
मुकददस माह-ए-रमजान की फजीलतों को लफ्जों में बयान नहीं किया जा सकता। रमजान इस्लामी कलैंडर का नौवा महीना है। यह माह बहुत ही बरक्कत और रहमत वाला महीना होता है। मौहम्मद साहब का इरसाद है कि अगर लोगों को मालूम हो जाए कि रमजान की क्या अहमियत है तो उम्मत ए तमन्ना करेगी कि पूरा साल रमजान ही हो जाए। यह बात आल इंडिया मिल्ल
via जागरण धर्म समाचार
http://www.jagran.com/spiritual/religion-rosa-spiritual-and-spiritual-benefits-of-keeping-10571007.html
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