अक्सर घरों की छत पर बैठकर कांव-कांव करने वाले कौए अब शहर में नजर नहीं आते। हालांकि, अक्सर लोग छत पर बैठे कौओं को उड़ा देते हैं, लेकिन पितृपक्...
अक्सर घरों की छत पर बैठकर कांव-कांव करने वाले कौए अब शहर में नजर नहीं आते। हालांकि, अक्सर लोग छत पर बैठे कौओं को उड़ा देते हैं, लेकिन पितृपक्...
प्रणाम का सीधा संबंध प्रणत शब्द से है, जिसका अर्थ होता है विनीत होना, नम्र होना और किसी के सामने सिर झुकाना। प्राचीन काल से प्रणाम की परंपरा...
कुछ अटपटा लगता है कि मृत आत्मा के लिए समर्पित पिंड खाने का काम आता है। लेकिन यही सत्य है। भले ही यह भोजन कहीं मजबूरी बस गरीब परिवार करता है।...
आश्रि्वन कृष्ण पंचमी 13 सितम्बर शनिवार है। 17 दिवसीय गया श्राद्ध का छठा दिन। भरणी नक्षत्र का योग होने से आज का श्राद्ध विशेष फलदायक है। विष्...
महर्षि व्यास के अनुसार, विश्व में मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं। उसी में परम चेतना को उभारने वाली विद्या का नाम अध्यात्म है। वस्तुत: अध्यात्...
कर्म का फल अवश्य ही मिलता है। लेकिन फल की इच्छा का त्याग करने से काम में गुणवत्ता तो आती है, व्यक्ति का नैतिक उत्थान भी होता है। आचार्य विनो...
दशलक्षण पर्व की समाप्ति के ठीक एक दिन बाद क्षमावाणी पर्व मनाया जाता है। श्वेतांबर जैन परंपरा में इसे संवत्सरी के नाम से पुकारते हैं, तो दिगं...
पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक माना जाता है जब वह अपने जीवन-काल में जीवित माता-पिता की सेवा करे और मरणोपरांत उनकी मृत्यु तिथि (बरसी) और पितृपक...
श्रद्धा का भाव। पितरों के प्रति पुत्रों की आस्था। सब कुछ समर्पण करने की लालसा। यहीं से शुरू होता है गयाजी का पिंडदान। प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्...
गैरोलीपातल से सिर्फ तीन किमी के फासले पर है वैतरणी, जिसे अब वेदिनी बुग्याल, वेदिनी कुंड नाम से भी पुकारा जाता है। पश्चिमी-उत्तरी ढलान पर फैल...
भाद्रपद मास की पूर्णिमा(सोमवार) से पितृ पक्ष प्रारंभ हो जाएंगे। मान्यता है कि 16 दिनों तक यानि आश्रि्वन मास की अमावस्या तक पितृगण पृथ्वी पर ...
भगोती नंदा को उसके सहयात्री चौसिंग्या खाडू के साथ कैलाश की ओर विदा कर हम कर्मपथ पर लौट आए हैं। लेकिन, इस यात्रा के अनुभव हमेशा जमा पूंजी की ...
पांच दिवसीय पाथावार नंदाजात के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नंदाठोंक शिखर पर पहुंचकर नंदा को मायके आने का आह्वान किया। सोमवार को ...
नाग पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाते हुए श्रद्धालुओं ने नाग देवता के आगे नतमस्तक होकर सुख-समृद्धि की दुआ मांगी। शनिवार को शहर के शिव मंदिरों के...
हरी मखमली घास के पड़ाव में रात्रि विश्राम के बाद नंदा पथ का अगला पड़ाव है पातरनचौंण्या। वैतरिणी (वेदिनी) कुंड से नौ किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दू...
गैरोलीपातल से सिर्फ तीन किमी के फासले पर है वैतरणी, जिसे अब वेदिनी बुग्याल, वेदिनी कुंड नाम से भी पुकारा जाता है। पश्चिमी-उत्तरी ढलान पर फैल...
राजजात अब हिमालयी क्षेत्र की ओर प्रवेश करने के पथ पर अग्रसर हो चुकी है। नदी घाटी से पर्वत श्रृंखलाओं की ओर जात के बढ़ने से नंदा पथ जिज्ञासा ...
चेपड़्यूं से जैसे-जैसे जात नंदकेसरी की ओर बढ़ती है, नंदा पथ में संस्कृतियों की त्रिवेणी बहने लगती है। समुद्रतल से 1325 मीटर की ऊंचाई पर इस पड़...
रंग पथ अब सौंदर्य पथ में तब्दील हो गया है। जैसा स्नेह अब तक बेटी पर मायके वालों का बरस रहा था, वैसा ही बहू पर ससुराली भी लुटा रहे हैं। कुलसा...
कहते हैं कि भक्त की एक ही पुकार पर भगवान दौड़े चले आते हैं, लेकिन भगोती नंदा के धर्मभाई एवं भगवान शिव के साले लाटू की माया ही निराली है। लाटू...