महर्षि याज्ञवल्क्य का अद्वैत दर्शन हमें वृहदारण्यक उपनिषद में मिलता है। उन्होंने आत्मा को ही ब्रहमा की संज्ञा दी है। भारतीय दर्शन की जितनी शाखाएं हैं, सबका निचोड़ उपनिषदों में मिलता है। उपनिषदों में सबसे प्राचीन तथा आकार में सबसे बड़ा उपनिषद बृहदारण्यक है। इस उपनिषद के दार्शिvia जागरण संत-साधक
http://www.jagran.com/spiritual/sant-saadhak-yajnavalkya-father-of-advaita-vedanta-10454983.html
0 comments:
Post a Comment