भय को जीवन की सहज प्रवृत्ति माना जाता है। अनुशासन, व्यवस्था, नियमादि के पालन के लिए भय की उपयोगिता है। जीवन की सुरक्षा, बचाव और सावधानी आदि के लिए भय की आवश्यकता है। इसके बावजूद भय एक सीमा तक सहनीय और उपयोगी भले ही हो, लेकिन लगातार डरे व सहमे-सहमे रहना, मूढ़ता, जड़ता, अज्ञान और आतंक से त्रस्त ग्रस्त रहना ठीक नहीं है। भय से मनोबलvia जागरण धर्म समाचार
http://www.jagran.com/spiritual/religion-morale-with-fear-fades-10454940.html
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