'न मंत्रं नो यंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो, न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा, न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं, परं जाने...
'न मंत्रं नो यंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो, न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा, न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं, परं जाने...
जयपुर [जागरण संवाददाता]। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक दरगाह ऐसी भी है जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मेला लगता है। नरहड कस्बे में ...
आमतौर पर मणिमहेश की यात्रा को 13 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन इस बार यात्रा का दायरा बढ़कर 26 किलोमीटर का हो चुका है। श...
अद्भुत, अलौकिक और अविस्मरणीय। देवी-देवताओं के साथ मानवीय संवेदनाओं के इस अनूठे रिश्ते का साक्षात्कार जिंदगी भर नहीं भुलाया जाएगा। नंदादेवी क...
पौ फटने से पहले ही घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनियां वातावरण में रस घोलने लगीं। पारंपरिक पकवानों की भीनी-भीनी महक हवा में मिठास पैदा कर रही है। ऐ...
सद्गुरु सुना रहे हैं बौद्ध भिक्षुओं की कहानी जब उनके भिक्षा-पात्र में मांस का एक टुकड़ा आ गिरा। via जागरण संत-साधक http://ift.tt/1w3TFpP
'न मंत्रं नो यंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो, न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा, न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं, परं जाने...
'सुफल ह्वे जाया नंदा तुमारी जातरा, खोली का गणेश न्यूताया मोरी का नारैणा' (भगोती नंदा हम तुम्हारी यात्रा करने जा रहे हैं, हमें सफलता ...
न मथुरा से कोई नाता, न वृंदावन से लगाव। डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल की 'भारत-सावित्री' ने सोच बदली तो 'श्रीमद्भागवत' ने राह दिखा...
जिला किन्नौर की जनजातीय परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी का अपना ही महत्व है। मुंबई की दही-हांडी और गोकुल-मथुरा की परंपराओं से कोसों दूर जिला क...
धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने वाले अब कम हो गए हैं। यदि कोई आपसे यह कहे तो समझिए कि उसे जानकारी नहीं है। ऐसी धारणा रखने वालों को गलत साबित कर रह...
एक साल से घुमड़ रहे आशंका के बादल छंटे और आशा का सूरज चमक उठा। सोमवार सुबह नंदा धाम नौटी भगवान भुवन भास्कर के प्रकाश से रोशन हुआ तो लगा मानो ...
जयपुर [जागरण संवाददाता]। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक दरगाह ऐसी भी है जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मेला लगता है। नरहड कस्बे में ...
शुभ विक्रम संवत- 2071, अयन- दक्षिणायन, मास- भाद्रपद, पक्ष- कृष्ण, हिजरी सन्- 1435, मु. मास- शव्वाल, तारीख- 22। दिवस तिथि- नवमी। दिवस नक्षत...
नंदबाबा के आंगन में लाला आ चुका था। नंदबाबा को बधाई देने भगवान कृष्ण के सखा और सखी पहुंचने लगे। लाला पाकर नंदबाबा और यशोदा मैया को सारे जहां...